इस लेख में
  1. बिग आइलैंड के पश्चिम का कोना कॉफ़ी बेल्ट
  2. कोना की प्रमुख किस्म: कोना टाइपिका
  3. खेती और कटाई
  4. कॉफ़ी के फल से हरी बीन्स तैयार करना
  5. हवाई राज्य के हरी कॉफ़ी ग्रेड
  6. कोना कॉफ़ी की सुगंध और स्वाद
  7. कोना कॉफ़ी की खेती का इतिहास
  8. हवाई की कॉफ़ी का उत्पादन और कीमत
  9. रोग, कीट और जलवायु के जोखिम
  10. 100% कोना और कोना ब्लेंड का अंतर
  11. 100% कोना पोर-ओवर की मूल रेसिपी
  12. Mahina में 100% कोना पोर-ओवर

कोना कॉफ़ी हवाई द्वीप, यानी बिग आइलैंड, के पश्चिम में हुआलालाई और मौना लोआ ज्वालामुखियों की ढलानों पर उगाई जाती है। प्रशांत महासागर की ओर झुकी इन ढलानों पर छोटे पारिवारिक बागान फैले हैं। किसान लंबे समय से यहाँ की प्रमुख किस्म कोना टाइपिका उगाते आए हैं। यह कॉफ़ी भरपूर सुगंध, कोमल खट्टेपन और चिकनी बनावट के लिए जानी जाती है। हर बागान की परिस्थितियाँ, प्रसंस्करण और रोस्टिंग इसे अलग पहचान देते हैं।

बिग आइलैंड के पश्चिम का कोना कॉफ़ी बेल्ट

कोना कॉफ़ी का कानूनी मूल-क्षेत्र हवाई द्वीप के नॉर्थ कोना और साउथ कोना हैं। इस इलाके की पश्चिमी ढलानों पर जहाँ कॉफ़ी के बागान केंद्रित हैं, उस खेती वाले क्षेत्र को ‘कोना कॉफ़ी बेल्ट’ कहते हैं।

हवाई द्वीप के पश्चिम में कोना कॉफ़ी बेल्ट का स्थान दिखाने वाला मानचित्र

पारंपरिक कोना कॉफ़ी बेल्ट पश्चिमी तट के समानांतर लगभग 32 km लंबा और लगभग 3.2 km चौड़ा है। यह उत्तर में पलानी जंक्शन से दक्षिण में पुउहोनुआ रोड तक जाता है। बागान समुद्र तल से लगभग 150–915 m की ऊँचाई पर हैं। लंबे समय से प्रमुख खेती वाले मध्य ढलान आम तौर पर लगभग 210–610 m पर हैं। ढलान की ऊँचाई और दिशा से धूप, बारिश, फूल आने और फल पकने का समय बदलता है।

कोना की खेती में छोटे पारिवारिक बागानों की प्रमुख भूमिका है। अधिकतर बागान लगभग 2 ha से छोटे हैं। पास-पास के बागानों में भी खेत की स्थिति, किस्म, कटाई और प्रसंस्करण के तरीके अलग होते हैं, इसलिए कोना कॉफ़ी के अलग-अलग स्वाद मिलते हैं।

बिग आइलैंड के होलुआलोआ में पकते कोना कॉफ़ी के फल
नॉर्थ कोना के होलुआलोआ में कॉफ़ी का बागान।

ऊँचाई, तापमान और दोपहर की बारिश

कोना की मध्य ढलानों का मध्यम तापमान अरेबिका की खेती के अनुकूल है। लगभग 445–510 m की ऊँचाई पर दर्ज अवलोकनों में वार्षिक औसत तापमान लगभग 20.6°C, औसत न्यूनतम लगभग 15.6°C और औसत अधिकतम लगभग 25.6°C था।

कॉफ़ी की खेती के लिए लगभग 1,520–2,160 mm वार्षिक वर्षा उपयुक्त बताई जाती है। बारिश का समय भी अहम है। पौधे बढ़ने, फूल आने और फल पकने के चरणों के अनुरूप बारिश मिले, तो पौधों की स्थिति और उपज को स्थिर रखने में मदद मिलती है।

कालोको-होनोकोहाउ से दिखता हुआलालाई ज्वालामुखी और कोना का तट
कालोको-होनोकोहाउ राष्ट्रीय ऐतिहासिक उद्यान से दिखता हुआलालाई।

कोना में बारिश अक्सर दोपहर के बाद केंद्रित होती है। दिन में पश्चिमी ढलान गर्म होती है, तो समुद्र की नम हवा भूमि की ओर आकर ढलान पर ऊपर उठती है। ऊँचाई बढ़ने पर हवा ठंडी होती है और जलवाष्प संघनित होकर बादल व बारिश बनाती है। समुद्र और ज्वालामुखी की ढलानों का यह साथ कोना के रोज़ाना मौसम को प्रभावित करता है।

कोना की पश्चिमी ढलानों पर दोपहर के बाद बादल बनने की प्रक्रिया

कोना की प्रमुख किस्म: कोना टाइपिका

कोना टाइपिका (Kona Typica), अरेबिका प्रजाति (Coffea arabica) की टाइपिका वंशावली से है। हवाई में जिसे लंबे समय तक ‘ग्वाटेमालन’ कहा गया, उसी वंश को कोना टाइपिका भी कहते हैं। हर्मन वीडेमान 1892 में इसे ग्वाटेमाला से हवाई लाए, और लगभग 1910 से कोना के किसानों ने इसे व्यापक रूप से उगाना शुरू किया।

कोना में कोना टाइपिका के साथ रेड कतूरा और दूसरी किस्में भी उगाई गई हैं। ‘कोना’ मूल-क्षेत्र बताता है और ‘टाइपिका’ किस्म। मूल-क्षेत्र के साथ किस्म और प्रसंस्करण विधि का नाम जोड़ने से कॉफ़ी का अधिक सटीक परिचय मिलता है।

खेती और कटाई

कोना के कॉफ़ी पौधों में कई बार फूल आते हैं। फूल आने का समय और बारंबारता ऊँचाई के अनुसार बदलती है। लगभग 370–520 m पर स्थित बागानों में फूल आने के तीन या अधिक प्रमुख दौर हो सकते हैं। लगभग 610–760 m की अधिक ऊँचाई पर फ़रवरी से अप्रैल के बीच ऐसे दो-तीन दौर हो सकते हैं, जबकि निचले इलाकों में फूल मुख्यतः फ़रवरी और मार्च में केंद्रित हो सकते हैं।

कई दौर में फूल आने पर एक ही पौधे के फल अलग-अलग समय पर पकते हैं। किसानों को पके फल कई बार चुनकर तोड़ने पड़ते हैं। इससे कटाई और रोग व कीट प्रबंधन की अवधि भी लंबी होती है।

कटाई में पूरी तरह पके फल चुने जाते हैं और रोगग्रस्त, कच्चे या ज़रूरत से ज़्यादा पके फल अलग किए जाते हैं। कटे फल लंबे समय तक ढेर में पड़े रहें, तो उनकी स्थिति बदलती है, इसलिए उन्हें जल्दी प्रसंस्करण स्थल तक पहुँचाना भी ज़रूरी है। समान पकावट के फल चुनना और कटाई के बाद तुरंत प्रक्रिया शुरू करना हरी कॉफ़ी बीन्स की गुणवत्ता का आधार है।

कॉफ़ी के फल से हरी बीन्स तैयार करना

कॉफ़ी के फल का गूदा और बाहरी परतें हटाने पर मिलने वाले, अभी भुने न गए बीजों को हरी कॉफ़ी बीन्स कहते हैं। प्रसंस्करण विधियों में मुख्य अंतर यह है कि गूदा कब हटाया जाता है और बीज किस अवस्था में सुखाए जाते हैं। कोना में पारंपरिक वेट प्रोसेस के साथ नैचुरल, हनी और नियंत्रित किण्वन वाली कॉफ़ी भी बनती है।

वेट प्रोसेसिंग

वेट प्रोसेसिंग को वॉश्ड (washed) भी कहते हैं। आम तौर पर चरण इस क्रम में होते हैं।

  1. पके फल तोड़ने के बाद बाहरी अशुद्धियाँ और दोष वाले फल अलग किए जाते हैं।
  2. पल्पर नाम की मशीन से गूदा हटाया जाता है।
  3. बीज को ढकने वाली कड़ी परत, यानी पार्चमेंट, की सतह पर लगी चिपचिपी म्यूसिलेज को किण्वन और धुलाई से या मशीन से हटाया जाता है।
  4. पार्चमेंट सहित बीजों को तब तक सुखाया जाता है, जब तक नमी समान रूप से कम न हो जाए।
  5. कुछ समय विश्राम देने के बाद पार्चमेंट हटाते हैं। आकार, घनत्व और दोषों के आधार पर छाँटकर हरी बीन्स तैयार की जाती हैं।

वेट प्रोसेसिंग हवाई में, ख़ासकर कोना में, लंबे समय से अपनाई जाती रही है। इसमें गूदा और म्यूसिलेज हटाकर बीज पार्चमेंट सहित सुखाए जाते हैं। किण्वन और धुलाई में म्यूसिलेज को समान रूप से हटाना और सुखाने में बीन्स की नमी एकसमान घटाना महत्त्वपूर्ण है।

ड्राई प्रोसेसिंग

ड्राई प्रोसेसिंग को नैचुरल (natural) भी कहते हैं। कटे हुए पूरे फल सुखाए जाते हैं; फिर सूखा गूदा, पार्चमेंट और बीज की सतह की पतली सिल्वरस्किन हटाकर हरी बीन्स मिलती हैं। गूदा लगा रहने के दौरान सुखाने से वॉश्ड कॉफ़ी से अलग स्वाद और सुगंध विकसित हो सकते हैं। कोना में भी फल जैसी सुगंध और भरपूर स्वाद वाली नैचुरल कॉफ़ी बनाई जाती है। हवाई राज्य के हरी कॉफ़ी ग्रेडिंग मानकों में ड्राई-प्रोसेस्ड कॉफ़ी के अलग प्रावधान हैं।

हनी प्रोसेसिंग और अवायवीय किण्वन

हनी (honey) प्रोसेसिंग में गूदा हटाने के बाद बीज के आसपास की म्यूसिलेज रहने देकर सुखाया जाता है। इसमें शहद नहीं मिलाते; कॉफ़ी के फल में स्वाभाविक रूप से मौजूद चिपचिपी परत का उपयोग होता है। कितनी म्यूसिलेज बचती है और सुखाने का तरीका कैसा है, इससे मिठास, बनावट और सुगंध प्रभावित होती हैं।

अवायवीय किण्वन (anaerobic fermentation) में ऐसे पात्र के भीतर किण्वन किया जाता है, जिसमें ऑक्सीजन का प्रवेश सीमित हो। हनी नाम सुखाने से पहले म्यूसिलेज के प्रबंधन को बताता है, जबकि अवायवीय किण्वन, किण्वन के वातावरण को। कोना में दोनों प्रक्रियाएँ साथ भी अपनाई जाती हैं, जैसे बंद वातावरण में किण्वन के बाद हनी विधि से सुखाना। बागान किस्म, कटाई की तारीख और किण्वन व सुखाने की परिस्थितियों के अनुसार उत्पादन को अलग-अलग लॉट (lot) में सँभालते हैं।

हवाई राज्य के हरी कॉफ़ी ग्रेड

हवाई राज्य के अधिकारी नमी, आकार, बीज की आकृति, दोषों की संख्या तथा बुनियादी रोस्टिंग और स्वाद-सुगंध की जाँच करके ग्रेड तय करते हैं। मुख्य ग्रेड हैं Extra Fancy, Fancy, No. 1, Select और Prime। इन मानकों का इस्तेमाल रोस्टिंग से पहले हरी बीन्स की छँटाई और व्यापार में होता है।

अगली तालिका वेट-प्रोसेस्ड कोना की हरी बीन्स के मुख्य ग्रेडों का संक्षेप है। सभी ग्रेडों में नमी का मानक 9.0–12.2% है। दोषों की गणना 300 g हरी बीन्स या कुल भार के आधार पर होती है।

ग्रेड मुख्य दोषों की अनुमत सीमा न्यूनतम आकार साथ में जाँचे जाने वाले पहलू
Kona Extra Fancy 300 g हरी बीन्स में अधिकतम 8 पूर्ण दोष Type I 19, Type II 13 एकसमान, अच्छा हरा रंग होना चाहिए; रोस्टिंग, सुगंध और स्वाद के मानक भी पूरे हों
Kona Fancy 300 g हरी बीन्स में अधिकतम 12 पूर्ण दोष Type I 18, Type II 12 Extra Fancy की तुलना में आकार और दोषों की सीमा अधिक उदार है
Kona No. 1 300 g हरी बीन्स में अधिकतम 18 पूर्ण दोष Type I 16, Type II 10 रंग, रोस्टिंग, सुगंध और स्वाद के मानक भी पूरे होने चाहिए
Kona Select दोषयुक्त बीन्स कुल भार के अधिकतम 5%; इनमें गंभीर दोष अधिकतम 2% कोई निर्धारित न्यूनतम आकार नहीं खट्टा होकर बिगड़ा स्वाद, किण्वन की दुर्गंध, फफूँद या रसायन जैसी गंध नहीं होनी चाहिए
Kona Prime दोषयुक्त बीन्स कुल भार के अधिकतम 15%; इनमें गंभीर दोष अधिकतम 5% कोई निर्धारित न्यूनतम आकार नहीं Select की तुलना में दोषों की अनुमत सीमा अधिक है

पीबेरी का आकार और ग्रेड

Type I में आम तौर पर एक फल के भीतर दो बीज अपनी सपाट सतहों को आमने-सामने रखकर बढ़ते हैं। Type II में एक ही बीज गोल आकार में बढ़ता है; व्यापार में इसे अक्सर पीबेरी (peaberry) कहते हैं। दोनों के आकार मापने के मानक अलग हैं। उदाहरण के लिए, Extra Fancy में Type I और Type II के अलग न्यूनतम आकार लागू होते हैं, और नमी व अनुमत दोषों की भी जाँच की जाती है।

कोना कॉफ़ी की सुगंध और स्वाद

कोना कॉफ़ी की प्रमुख विशेषताएँ भरपूर सुगंध, कोमल खट्टापन और चिकनी बनावट हैं। कोना टाइपिका पर आधारित पारंपरिक शैली में सुगंध, अम्लता और बनावट का संतुलन महत्त्वपूर्ण है। बागान की स्थिति, किस्म, फल की पकावट, प्रसंस्करण और रोस्टिंग मिलकर हर कॉफ़ी की अलग पहचान बनाते हैं।

रोस्टिंग से बदलने वाला स्वाद

मध्यम स्तर की सिटी रोस्ट (city roast) का इस्तेमाल कोना कॉफ़ी की सुगंध, अम्लता और बनावट को संतुलित रखने के लिए किया जाता है। भुनाई बढ़ने पर रोस्टिंग से बनने वाली सुगंध और कड़वाहट अधिक स्पष्ट होती हैं; अम्लता की अनुभूति और बनावट भी बदलती हैं। इसलिए एक ही बागान की हरी बीन्स से बनी कॉफ़ी भी रोस्टर के भुनाई रोकने के बिंदु के अनुसार अलग महसूस होती है।

प्रसंस्करण से आने वाले स्वाद के अंतर

कोना में प्रसंस्करण के तरीके भी विविध हुए हैं। गूदा और म्यूसिलेज हटाकर वॉश्ड, म्यूसिलेज रहने देकर हनी और पूरे फल सुखाकर नैचुरल कॉफ़ी बनाई जाती है। कुछ उत्पादक हनी प्रक्रिया से मिठास और भरपूर बनावट, तथा नैचुरल प्रक्रिया से फल जैसी सुगंध उभारते हैं। इस तरह पारंपरिक कोना के चिकने स्वाद के साथ प्रसंस्करण से जुड़ी अतिरिक्त सुगंधों का आनंद मिलता है।

स्वाद को अलग-अलग चरणों में परखना उपयोगी है: पीने से पहले की सुगंध, पहली घूँट की अम्लता और मिठास, मुँह में बनावट और निगलने के बाद बचने वाला स्वाद। गरम होने पर उठती सुगंध का आनंद लें और थोड़ा ठंडा होने के बाद मिठास व अम्लता का संतुलन धीरे-धीरे महसूस करें।

कोना कॉफ़ी की खेती का इतिहास

1813 में डॉन पाउलो मारिन ने हवाई में कॉफ़ी उगाने की कोशिश की, लेकिन उसे स्थापित नहीं कर पाए। 1825 में जॉन विल्किन्सन और हवाई के उच्च प्रमुख बोकी ने मानोआ में कॉफ़ी लगाई। इसके बाद सैमुअल रगल्स 1828 में मानोआ के कॉफ़ी पौधे कोना ले गए।

1892 में हर्मन वीडेमान ग्वाटेमाला से टाइपिका वंश के पौधे लाए। यही वंश बाद में ग्वाटेमालन या कोना टाइपिका के नाम से स्थापित हुआ।

20वीं सदी की शुरुआत में कोना का कॉफ़ी उद्योग जापानी प्रवासी किसान परिवारों सहित कई समुदायों के श्रम और छोटे पारिवारिक बागानों के सहारे बढ़ा। लगभग 1920 तक कोना के करीब 80% कॉफ़ी बागान छोटे पारिवारिक खेत थे। किसान गूदा हटाने के उपकरण और खिसकने वाली छत वाले सुखाने के मंच होशिदाना (hoshidana) इस्तेमाल करते थे। आज सुरक्षित उचिदा कॉफ़ी फ़ार्म और जीवन-इतिहास के अभिलेख उस समय के परिवारों के रहने की जगह और कॉफ़ी उत्पादन के उपकरण दोनों दिखाते हैं।

काम और रोज़मर्रा की कठिनाइयाँ मिलकर हल करने के लिए किसानों ने ‘कुमी (kumi)’ नाम के सामुदायिक सहायता संगठन बनाए। पूँजी जुटाने के लिए क्रेडिट यूनियन और कॉफ़ी बेचने के लिए सहकारी संस्थाएँ भी बनीं। कोना कॉफ़ी का इतिहास केवल खेती की तकनीक का नहीं, बल्कि छोटे परिवारों द्वारा उत्पादन और जीवन जारी रखने का भी इतिहास है।

हवाई की कॉफ़ी का उत्पादन और कीमत

23 जनवरी 2026 को प्रकाशित पूरे हवाई राज्य का 2025–2026 कॉफ़ी उत्पादन अनुमान इस प्रकार था।

  • फल देने वाला खेती क्षेत्र: लगभग 2,630 ha
  • कुल उत्पादन: कॉफ़ी के फल के आधार पर लगभग 8,255 t
  • बाज़ार में भेजे जाने की अनुमानित मात्रा: कॉफ़ी के फल के आधार पर लगभग 8,094 t
  • औसत कीमत: कॉफ़ी के फल के आधार पर लगभग US$5.14/kg
  • बाज़ार में भेजे जाने वाले उत्पादन का अनुमानित मूल्य: US$41,579,000

बाज़ार में भेजे जाने की अनुमानित मात्रा पिछले सीज़न से 20% कम रहने का अनुमान था।

ये आँकड़े खेत में काटे गए कॉफ़ी फल के चरण पर उत्पादन और बाज़ार में भेजी जाने वाली मात्रा बताते हैं। गूदा हटाने, सुखाने, बाहरी परतें निकालने और रोस्टिंग के दौरान भार घटता है। हर चरण में छँटाई और प्रसंस्करण का खर्च भी जुड़ता है।

कोना कॉफ़ी के उत्पादन में ढलान वाले छोटे खेतों की देखभाल, कई दौर की कटाई, रोग व कीट नियंत्रण, छँटाई और सुखाना शामिल हैं। हवाई में श्रम और भूमि का खर्च, प्रमाणन, प्रसंस्करण और परिवहन भी जुड़ते हैं। सीमित खेती क्षेत्र और अधिक मेहनत वाली उत्पादन प्रक्रिया कोना की कीमत समझने के महत्त्वपूर्ण कारण हैं।

रोग, कीट और जलवायु के जोखिम

कॉफ़ी बेरी बोरर

कॉफ़ी बेरी बोरर (CBB), वैज्ञानिक नाम Hypothenemus hampei, एक छोटा कीट है। मादा कॉफ़ी फल में छेद करके बीज तक पहुँचती है और नुकसान करती है। हवाई में इसकी पहली पुष्टि अगस्त 2010 में साउथ कोना में हुई।

पेड़ या ज़मीन पर फल छोड़ देने से कीट जीवित रह सकता है और अगली फसल के समय फिर बढ़ सकता है। किसानों को नियमित कटाई, सीज़न के अंत में बचे फल हटाने और कीटों की संख्या की लगातार निगरानी को साथ अपनाना होता है। कई उपयुक्त तरीकों को मिलाकर प्रबंधन करना एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) कहलाता है।

कॉफ़ी लीफ़ रस्ट

कॉफ़ी लीफ़ रस्ट (CLR), वैज्ञानिक नाम Hemileia vastatrix, एक कवकीय रोग है। 2020 में हवाई में पहली पुष्टि के बाद यह प्रमुख द्वीपों तक फैल गया। हवाई से लिए गए नमूनों को रेस XXIV के रूप में पहचाना गया। यह रेस कोना टाइपिका सहित कई अरेबिका वंशों में रोग पैदा कर सकती है।

किसानों को रोग के संकेत जल्दी पहचानने और शाखाओं व पत्तियों को बहुत घना न होने देने की ज़रूरत है। पौधों के पोषण, खेत की स्वच्छता और कानूनी रूप से अनुमत नियंत्रण विधियों पर भी ध्यान देना होता है। रोग सहने वाली किस्मों का विकास भी महत्त्वपूर्ण है।

सूखा और मौसम में बदलाव

कॉफ़ी के पौधों में सूखे दौर के बाद बारिश होने पर फूल आने की प्रवृत्ति होती है। फल बढ़ते समय पानी की कमी उपज और पौधे के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। हवाई में 2023–2024 के उत्पादन में गिरावट के पीछे लीफ़ रस्ट, बेरी बोरर, सूखा, अनियमित मौसम और श्रमिकों की कमी, सभी कारण बताए गए। रोग व कीट नियंत्रण, पानी का प्रबंधन और कटाई के लिए श्रम उपलब्ध कराना कोना के किसानों के लिए भी अहम है।

100% कोना और कोना ब्लेंड का अंतर

100% Kona Coffee में सारी बीन्स कोना की होती हैं। Kona Coffee Blend में कोना और दूसरे मूल-क्षेत्रों की बीन्स मिलाई जाती हैं। मूल-क्षेत्र के अनुपात रोस्टिंग से पहले हरी बीन्स के भार पर आधारित होते हैं।

लेबल बीन्स और प्रसंस्करण की शर्तें
100% Kona Coffee पूरी तरह कोना की बीन्स से बनी कॉफ़ी
Kona Coffee Blend कोना और दूसरे मूल-क्षेत्रों की बीन्स का मिश्रण। पैकेट के सामने कोना की मात्रा और हर मूल-क्षेत्र का भार-प्रतिशत दिया जाता है।
All Hawaiian सभी बीन्स हवाई में उगाई और संसाधित की गई हों। डीकैफ़ उत्पादों में कैफ़ीन हटाने का काम भी हवाई में हो।
100% Arabica सभी बीन्स अरेबिका प्रजाति की हैं। कोना भौगोलिक मूल-क्षेत्र बताता है; अरेबिका कॉफ़ी के पौधे की प्रजाति।

एक ही उत्पाद पर 100% Kona Coffee और All Hawaiian दोनों लिखे जा सकते हैं। हवाई के अलग-अलग क्षेत्रों की बीन्स मिलाने पर भी, यदि खेती और प्रसंस्करण दोनों पूरी तरह हवाई में हुए हों, तो वह All Hawaiian की श्रेणी में आता है।

ब्लेंड में Contains: के बाद मूल-क्षेत्रों के भार-प्रतिशत अधिक से कम क्रम में लिखे जाते हैं और कुल 100% होता है। तय शर्तें पूरी होने पर अलग-अलग विदेशी मूल की बीन्स को Foreign-grown Coffee के रूप में एक साथ दिखाया जा सकता है। हवाई के किसी क्षेत्र के नाम वाले उत्पाद में इस्तेमाल हरी बीन्स को राज्य के ग्रेड मानक भी पूरे करने होते हैं।

कोना ब्लेंड की न्यूनतम मात्रा और लागू होने की समय-सारणी

हवाई ने 2023 के अधिनियम संख्या 211 (Act 211) से लेबलिंग के दायरे और मूल-क्षेत्रवार प्रतिशत की जानकारी बढ़ाई। 2024 के अधिनियम संख्या 198 (Act 198) ने क्षेत्रीय नाम वाले ब्लेंड में उस क्षेत्र की कॉफ़ी की न्यूनतम मात्रा बढ़ाई। सितंबर 2026 की स्थिति में लागू होने की समय-सारणी नीचे है।

समय बदलाव
5 जुलाई 2023 को हस्ताक्षर; 1 जुलाई 2024 से लागू और प्रवर्तन शुरू अधिनियम 211 ने रोस्टेड और इंस्टेंट कॉफ़ी के अलावा पहले से पैक तैयार-पेय कॉफ़ी तथा आवास सुविधाओं में दिए जाने वाले व्यक्तिगत ब्रूइंग पैक तक दायरा बढ़ाया। ब्लेंड के पैकेट के सामने मूल-क्षेत्रवार भार-प्रतिशत बताना और संबंधित अभिलेख रखना आवश्यक है।
3 जुलाई 2024 को हस्ताक्षर; कानूनी प्रभाव 1 जुलाई 2024 से अधिनियम 198 ने हवाई के किसी क्षेत्र के नाम वाले ब्लेंड में उस क्षेत्र की बीन्स की न्यूनतम मात्रा 51% कर दी। नया अनुपात 1 जुलाई 2027 से लागू होगा।
30 जून 2027 तक हवाई के क्षेत्रीय नाम के साथ लेबल किए या विज्ञापित किए जाने वाले संबंधित ब्लेंड में उस क्षेत्र की कॉफ़ी भार के आधार पर कम-से-कम 10% होनी चाहिए।
1 जुलाई 2027 से यही न्यूनतम मात्रा भार के आधार पर 51% हो जाएगी।

इस कानून में तैयार-पेय कॉफ़ी का अर्थ बिक्री से पहले पैक किया गया उत्पाद है। ऑर्डर मिलने के बाद बनाए गए पेय इस परिभाषा से बाहर हैं।

100% कोना पोर-ओवर की मूल रेसिपी

पोर-ओवर, कोना कॉफ़ी की सुगंध, अम्लता और बनावट का धीरे-धीरे आनंद लेने की अच्छी विधि है। इस रेसिपी से एक कप बनाएँ, फिर रोस्टिंग और अपनी पसंद के अनुसार बदलाव करें।

  • कॉफ़ी बीन्स: 15 g
  • पानी: 250 g
  • कॉफ़ी और पानी का अनुपात: लगभग 1:17
  • पानी का तापमान: 92–94°C
  • पिसाई: मध्यम
  • ब्लूम: 45 g पानी डालकर 45 सेकंड रुकें
  • मुख्य ब्रूइंग: दो-तीन बार में पानी डालें, जब तक कुल मात्रा 250 g न हो जाए
साउथ कोना के कैप्टन कुक के एक कॉफ़ी बागान में पोर-ओवर की तैयारी
साउथ कोना के कैप्टन कुक में कॉफ़ी का बागान।

गहरी भुनी कॉफ़ी में कड़वाहट जल्दी बढ़े, तो पानी का तापमान घटाएँ या थोड़ा मोटा पीसें। यदि केवल तीखा खट्टापन आए और सुगंध पूरी न उभरे, तो थोड़ा बारीक पीसें या पानी व कॉफ़ी के संपर्क का समय बढ़ाएँ। एक बार में एक ही चीज़ बदलने से स्वाद में बदलाव का कारण समझना आसान होता है।

Mahina में 100% कोना पोर-ओवर

Mahina Vegan Table में 100% हवाई कोना सिंगल-ओरिजिन कॉफ़ी पोर-ओवर के रूप में परोसी जाती है। ताज़ा बनी कॉफ़ी की सुगंध लें और गरम पहली घूँट से लेकर कप थोड़ा ठंडा होने के बाद के स्वाद तक धीरे-धीरे आनंद लें। कोना कॉफ़ी का एक कप भोजन के बाद आराम से बिताए जाने वाले समय का साथ दे सकता है।

Mahina में परोसी गई कॉफ़ी और पेय
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