इस लेख में
  1. संगीत सुनने के लिए बर्फ़ में इंतज़ार करता युवक
  2. अमेरिकी संगीत पर बहस
  3. 1893 की सिम्फ़नी और 1922 का गीत
  4. अमेरिका में चेक भाषा बोलने वाला गाँव
  5. द्वोर्जाक को गीत सुनाने वाले संगीतकार का आगे का काम
  6. माहिना में लार्गो सुनना
  7. माहिना में सुनने का संगीत

संक्षिप्त उत्तर

द्वोर्जाक की न्यू वर्ल्ड सिम्फ़नी में इंग्लिश हॉर्न पर बजने वाली धुन में बाद में शब्द जोड़े गए। वह 1922 में विलियम आर्म्स फ़िशर का बनाया गोइंग होम है। उससे पहले सिम्फ़नी रचते समय द्वोर्जाक के पास युवा संगीतकार हैरी बर्ली थे, जो अपने नाना से सीखे अफ़्रीकी अमेरिकी आध्यात्मिक गीत उन्हें गाकर सुनाते थे।

विस्तार से

संगीत सुनने के लिए बर्फ़ में इंतज़ार करता युवक

बर्ली अमेरिका के पेंसिल्वेनिया राज्य के ईरी शहर में पले-बढ़े। उन्होंने माँ से संगीत और नाना से अफ़्रीकी अमेरिकी आध्यात्मिक गीत सीखे। उनके नाना ने गुलामी में जीवन बिताया था और पैसे देकर अपनी स्वतंत्रता हासिल की थी। बर्ली चर्च और स्थानीय आयोजनों में गाते थे। उन्होंने पियानो और गायन का अध्ययन भी किया। ईरी के एपिस्कोपल कैथेड्रल, प्रेस्बिटेरियन चर्च और यहूदी प्रार्थनाघर के गायक दलों में उन्होंने गाया। प्रार्थना के समय अलग होने से वह कई जगह काम कर पाते थे। बचपन में परिवार से सीखे गीत और स्थानीय प्रार्थना में गाया संगीत बाद में उनके गायन और संगीत-संयोजन के काम में शामिल हुआ।

किशोरावस्था के अंतिम वर्षों में बर्ली हंगरी के पियानोवादक राफ़ाएल योसेफ़ी को सुनना चाहते थे। वह एक घर के बाहर बर्फ़ में खड़े होकर इंतज़ार करते रहे। यह एलिज़ाबेथ रसेल का घर था, जहाँ उनकी माँ काम करती थीं। वहाँ नस्ल के आधार पर मेहमानों को प्रवेश मिलता था। बर्ली श्रोता बनकर अंदर नहीं जा सकते थे। अंततः वह बीमार हो गए। कारण जानने पर उनकी माँ ने रसेल से बेटे को दरवाज़े पर काम देने का अनुरोध किया। इस काम के दौरान बर्ली ने तेरेसा कारेन्यो और इतालो काम्पानिनी जैसे संगीतकारों की प्रस्तुतियाँ सुनीं।

1892 में छात्रवृत्ति मिलने पर बर्ली न्यूयॉर्क के नेशनल कंज़र्वेटरी ऑफ़ म्यूज़िक में दाखिल हुए। द्वोर्जाक उसी संस्थान के निदेशक थे। वह अक्सर बर्ली से गाने को कहते थे। बर्ली ने बाद में बताया कि दिनभर काम करने के बाद संगीतकार रात के भोजन के पश्चात उनका गायन सुनते थे। बर्ली वे अफ़्रीकी अमेरिकी गीत गाते थे जिन्हें वह जानते थे। अमेरिका में द्वोर्जाक के संगीत संबंधी अनुभवों में इस तरह दूसरे संगीतकार की आवाज़ सीधे सुनना भी शामिल था।

अमेरिकी संगीत पर बहस

द्वोर्जाक को बुलाने वाली संगीत संस्थान की संस्थापक जीनेट थर्बर अमेरिका में संगीतकारों को तैयार करना चाहती थीं। संस्थान अश्वेत और अन्य गैरश्वेत विद्यार्थियों को भी प्रवेश देता था। द्वोर्जाक रचना सिखाते और ऑर्केस्ट्रा का संचालन करते थे। संस्थान के बाहर न्यूयॉर्क में जर्मन मूल के बहुत से संगीतकार और आलोचक थे। वह उनसे जर्मन में बात करते थे। चेक देश से आया संगीतकार अमेरिकी विद्यार्थियों को पढ़ा रहा था और यूरोप से आए सहयोगियों से मिल रहा था। इसी परिवेश में उन्होंने न्यू वर्ल्ड सिम्फ़नी की तैयारी की।

मई 1893 में द्वोर्जाक ने सार्वजनिक रूप से कहा कि अमेरिका की अफ़्रीकी अमेरिकी धुनों के आधार पर उसकी अपनी रचना परंपरा विकसित की जा सकती है। उस समय बहुत से अमेरिकी संगीतकार जर्मन सिम्फ़नी परंपरा को मानक मानते थे। हार्वर्ड के जॉन नोल्स पेन ने सोचा कि अख़बार ने द्वोर्जाक की बात ग़लत छापी होगी। संगीतकार एमी बीच लोकसंगीत इस्तेमाल करने से सहमत थीं, पर उन्होंने पूछा कि क्या अफ़्रीकी अमेरिकी संगीत पूरे अमेरिका का प्रतिनिधित्व करता है। संगीतकारों को किस संगीत से सीखना चाहिए, इस पर बहस शुरू हुई।

द्वोर्जाक चेक लोकसंगीत और पश्चिमी रचना तकनीकों को साथ इस्तेमाल करते आए थे। अमेरिका में सुने गीतों में भी उन्होंने पाँच स्वरों को केंद्र में रखकर बनी धुनों और सिंकोपेशन पर ध्यान दिया। सिंकोपेशन में उस जगह ज़ोर दिया जाता है जो आम तौर पर हल्की होती है, जिससे लय बदलती है। उनकी रुचि परिचित गीतों के नामों तक सीमित नहीं थी। वह धुन और लय बनाने के तरीके पर ध्यान देते थे। बर्ली के सुनाए गीतों से सीखकर द्वोर्जाक ने नए मुख्य विषय लिखे और उन्हें चार खंडों वाली सिम्फ़नी में विकसित किया।

1893 की सिम्फ़नी और 1922 का गीत

न्यू वर्ल्ड सिम्फ़नी 1893 में न्यूयॉर्क में पूरी हुई। उसी वर्ष 16 दिसंबर को आंतोन ज़ाइडल के निर्देशन में न्यूयॉर्क फ़िलहार्मोनिक ने कार्नेगी हॉल में इसकी पहली प्रस्तुति दी। दूसरे खंड लार्गो (Largo) का प्रसिद्ध मुख्य विषय द्वोर्जाक की अपनी रची धुन है। इसे इंग्लिश हॉर्न बजाता है। इसके छोटे और सरल वाक्य किसी पुराने लोकगीत जैसे सुनाई दे सकते हैं, लेकिन गोइंग होम नाम का गीत बाद में बना। आज सिम्फ़नी और गायन में एक ही धुन सुनाई देने के पीछे अलग-अलग समय पर हुई रचना और संगीत-संयोजन का काम है।

विलियम आर्म्स फ़िशर के शब्दों वाले Goin' Home की शुरुआती स्वरलिपि का एक अंश।
विलियम आर्म्स फ़िशर के शब्दों वाले Goin' Home की शुरुआती स्वरलिपि का एक अंश।

फ़िशर अमेरिकी संगीतकार थे जिन्होंने द्वोर्जाक से सीखा था। उन्होंने याद किया कि 1922 में लार्गो का पियानो रूप बजाते समय उनके मन में घर लौटने के शब्द आए। इन शब्दों को गीत के बोलों में विकसित करके उन्होंने गोइंग होम बनाया। उन्होंने सिम्फ़नी की धुन के साथ मानव आवाज़ और वाक्य जोड़े। घर लौटने वाला शीर्षक जानने पर श्रोता उसी धुन में गीत की बात याद करने लगते हैं। इस तरह पहले प्रकाशित ऑर्केस्ट्रा की रचना को बाद में बने गीत के नाम से याद किया जाने लगा।

द्वोर्जाक की हस्तलिखित न्यू वर्ल्ड सिम्फ़नी का शीर्षक पृष्ठ।
द्वोर्जाक की हस्तलिखित न्यू वर्ल्ड सिम्फ़नी का शीर्षक पृष्ठ।

फ़िशर का गोइंग होम 1922 में बोस्टन के प्रकाशक ऑलिवर डिट्सन ने प्रकाशित किया। नीचे के स्वर में गाने वाली आवाज़ और पियानो के लिए बनी शुरुआती स्वरलिपि भी आज तक सुरक्षित है। मुखपृष्ठ पर लिखा है कि संगीत न्यू वर्ल्ड सिम्फ़नी के लार्गो से लिया गया है। साथ में द्वोर्जाक और फ़िशर के नाम हैं। गायक फ़िशर के शब्द गाता है और पियानोवादक ऑर्केस्ट्रा की जगह साथ देता है। ऑर्केस्ट्रा की धुन को एकल गायक और पियानोवादक के साथ प्रस्तुत करने के लिए ढाला गया।

अमेरिका में चेक भाषा बोलने वाला गाँव

सिम्फ़नी पूरी करने के बाद द्वोर्जाक ने 1893 की गर्मियाँ आयोवा के स्पिलविल में बिताईं। उनके सहायक योसेफ़ कोवार्जीक ने छुट्टी के लिए अपने गाँव जाने की सलाह दी थी। चेक प्रवासियों के इस छोटे गाँव में चेक भाषा में प्रार्थना करने वाला चर्च और स्कूल था। यूरोप में रह गए बच्चे अमेरिका पहुँचे, तो पूरा परिवार रेल से वहाँ गया। द्वोर्जाक ने अपने देश के दोस्तों को लिखे पत्र में स्पिलविल के जीवन की तुलना बोहेमिया के विसोका में रहने से की।

स्पिलविल के चर्च और स्कूल का वर्णन करते हुए द्वोर्जाक का 1894 में लिखा पाठ।
स्पिलविल के चर्च और स्कूल का वर्णन करते हुए द्वोर्जाक का 1894 में लिखा पाठ।

द्वोर्जाक सुबह जल्दी टहलते और सेंट वेंसिस्लास चर्च में ऑर्गन बजाते थे। सुबह रचना करते और दोपहर परिवार के साथ बिताते या आसपास के गाँवों में घूमने जाते थे। शाम को गाँव के लोगों से अमेरिका में बसने के अनुभव सुनते थे। बुज़ुर्गों को अच्छा लगता था कि वह ऑर्गन पर उनके परिचित भजन बजाते थे। इसी गर्मी में उन्होंने अमेरिकन स्ट्रिंग क्वार्टेट और स्ट्रिंग क्विंटेट लिखे। चेक भाषा में बात कर सकने वाले पड़ोसियों और फिर साथ आ गए परिवार के पास रहते हुए बनी ये दो रचनाएँ न्यूयॉर्क में पहले पूरी हुई सिम्फ़नी के बाद उनके अमेरिकी जीवन का प्रमुख संगीत बनीं।

द्वोर्जाक को गीत सुनाने वाले संगीतकार का आगे का काम

1892 में बर्ली सोप्रानो सिसिएरेट्टा जोन्स के साथ कार्नेगी हॉल के मंच पर आए थे। संगीत संस्थान छोड़ने के बाद भी वह गायक और संगीतकार के रूप में काम करते रहे। बाद में उन्होंने वहाँ अपने गीत गाए और उनके संयोजित आध्यात्मिक गीत दूसरे संगीतकारों की प्रस्तुतियों में इस्तेमाल हुए। बर्ली द्वोर्जाक को आध्यात्मिक गीत सुनाने वाले विद्यार्थी थे। वह अपने संगीत के साथ मंच पर आने, रचना करने और गायन जारी रखने वाले कलाकार भी थे। जिस विद्यार्थी ने वे गीत सुनाए थे, उसने बाद में उसी संगीत परंपरा को प्रस्तुतियों और प्रकाशन से आगे पहुँचाया।

हैरी बर्ली के संयोजित Deep River की 1917 की स्वरलिपि का पहला पृष्ठ।
हैरी बर्ली के संयोजित Deep River की 1917 की स्वरलिपि का पहला पृष्ठ।

1894 में बर्ली को न्यूयॉर्क के सेंट जॉर्ज एपिस्कोपल चर्च में एकल गायक का काम मिला। कुछ लोगों ने उनके अश्वेत होने के कारण विरोध किया, फिर भी वह वहाँ लंबे समय तक गाते रहे। उन्होंने दूसरे प्रार्थना समुदाय में भी गाया, प्रकाशन संस्था में स्वरलिपियाँ संपादित कीं और अपने गीत तथा आध्यात्मिक गीतों के संयोजन प्रकाशित किए। द्वोर्जाक की सिम्फ़नी पर इन गीतों का प्रभाव पढ़ते समय बर्ली ने आगे क्या काम किया, उसे भी देखा जा सकता है। परिवार से बचपन में सीखे गीतों को संगीत सभाओं में गाने योग्य रूप देना उनके लगातार किए काम का हिस्सा था।

बर्ली के संयोजित डीप रिवर की रिकॉर्डिंग 1916 में हुई। बैरिटोन ऑस्कर सीगल ने ऑर्केस्ट्रा के साथ उसे गाया। इस रिकॉर्डिंग में बर्ली ने नया गीत नहीं रचा था। उन्होंने परंपरा से मिले गीत को प्रस्तुति के अनुकूल संयोजित किया था। उन्होंने गीत को एकल गायक के गाने योग्य रूप दिया। न्यू वर्ल्ड सिम्फ़नी का लार्गो सुनने के बाद इस रिकॉर्डिंग को सुनने पर बर्ली के द्वोर्जाक तक पहुँचाए संगीत की परंपरा और उनका अपना संयोजन, दोनों समझे जा सकते हैं। डीप रिवर और गोइंग होम अलग-अलग रास्तों से गायकों के कार्यक्रमों में आए।

माहिना में लार्गो सुनना

माहिना की दोपहर और शाम की सूचियों में मारिस यानसोंस के निर्देशन में बजाया लार्गो का शुरुआती हिस्सा है। शाम में सोल्टी और लंदन फ़िलहार्मोनिक की प्रस्तुतियाँ भी सुनने को मिलती हैं। पूरे लार्गो में इंग्लिश हॉर्न की धुन के बाद उससे अलग संगीत आता है और फिर शुरुआती धुन लौटती है।

लार्गो के साथ बर्ली का संयोजित डीप रिवर भी सुना जा सकता है। गोइंग होम में फ़िशर ने ऑर्केस्ट्रा की धुन पर नए शब्द लगाए। डीप रिवर में बर्ली ने परंपरा से मिले आध्यात्मिक गीत को एकल गायन और संगत के लिए ढाला। एक रचना सिम्फ़नी से गीत बनी। दूसरी लोगों में प्रचलित आध्यात्मिक गीत से संगीत सभा की रचना बनी। बर्ली और फ़िशर की प्रकाशित स्वरलिपियों पर उनके अपने नाम हैं और गायकों ने उनका संगीत आगे गाया। सिम्फ़नी के इंग्लिश हॉर्न और एकल गायक की आवाज़ में एक ही धुन वाला गोइंग होम तथा बर्ली के संयोजन से पहुँचा डीप रिवर, दोनों को साथ सुन सकते हैं।

माहिना में सुनने का संगीत

माहिना में हम न्यू वर्ल्ड सिम्फ़नी का लार्गो सुनाते हैं। इस धुन को सुनकर अपने साथ आए लोगों से अपने-अपने घर और जन्मस्थल पर सुने गीतों की बात कर सकते हैं। द्वोर्जाक और बर्ली ने जो गीत साझा किए थे, उस बातचीत में आप अपनी यादें भी जोड़ सकते हैं।